पुरानी बनाम नई कर व्यवस्था 2025: आमने-सामने तुलना

प्रकाशित: 2026-01-26

वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारतीय करदाताओं के लिए पुरानी (Old) और नई (New) कर व्यवस्था के बीच चयन करना सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय है। यह मार्गदर्शिका कम कर दरों (नई व्यवस्था) और उच्च कर कटौती (पुरानी व्यवस्था) के बीच के ट्रेड-ऑफ़ (trade-offs) का गहराई से विश्लेषण करती है।

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1. 2025 बजट: नई टैक्स व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव

वित्त अधिनियम (Finance Act) 2025 ने भारत में कर नियोजन (Tax Planning) परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल दिया है। हालांकि नई कर व्यवस्था (धारा 115BAC) 2023 से ही डिफ़ॉल्ट रही है, लेकिन 2025 के संशोधनों ने मध्यम-आय अर्जित करने वालों के लिए पुरानी व्यवस्था को चुनना लगभग असंभव बना दिया है। सबसे बड़ा बदलाव? कर-मुक्त (Tax-free) आय की सीमा अब ₹12 लाख (वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख) तक हो गई है।

2. 2025-26 टैक्स स्लैब: आमने-सामने की तुलना

नई कर व्यवस्था (Sec 115BAC)

0 - 4 लाख शून्य (Nil)
4 - 8 लाख 5%
8 - 12 लाख 10%
12 - 16 लाख 15%
16 - 20 लाख 20%
20 - 24 लाख 25%
24 लाख से अधिक 30%

पुरानी कर व्यवस्था (Old Regime)

0 - 2.5 लाख शून्य (Nil)
2.5 - 5 लाख 5%
5 - 10 लाख 20%
10 लाख से अधिक 30%

*बुनियादी छूट वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens 60+) के लिए ₹3 लाख और अति-वरिष्ठ (Super Seniors 80+) के लिए ₹5 लाख है।

3. "₹12 लाख" का लाभ (धारा 87A की छूट)

2025 कर कोड में सबसे शक्तिशाली प्रावधानों में से एक विस्तारित धारा 87A छूट (Rebate) है। नई व्यवस्था का विकल्प चुनने वाले व्यक्तियों के लिए, यदि उनकी कुल कर योग्य आय ₹12,00,000 से अधिक नहीं है, तो उनका टैक्स शून्य हो जाता है (₹60,000 तक की अधिकतम छूट)। नई व्यवस्था में ₹75,000 की मानक कटौती (Standard Deduction) के साथ, कुल ₹12,75,000 कमाने वाले वेतनभोगी कर्मचारी को बिल्कुल कोई कर (Tax) नहीं देना पड़ता है।

विशेषज्ञ टिप: सीमांत राहत (Marginal Relief) ₹12 लाख से थोड़ी अधिक आय पर लागू होती है, जो सुनिश्चित करती है कि आप ₹12 लाख से अधिक कमाए गए अतिरिक्त धन से अधिक कर का भुगतान न करें।

4. कटौतियाँ (Deductions): आपको क्या मिलता है और क्या नहीं?

कम कर दरों (नई व्यवस्था) का लाभ उठाने के लिए, आपको पुरानी व्यवस्था की अधिकांश कटौतियों को छोड़ना होगा। यहाँ एक सूची दी गई है कि नई व्यवस्था में क्या मान्य है और क्या नहीं:

छूट / कटौती (Deduction)नई व्यवस्था (New) 2025पुरानी व्यवस्था (Old)
मानक कटौती (Standard Deduction)₹75,000 (Sec 16(ia))₹50,000
80C (PPF, ELSS, Insurance)नहींहाँ (₹1.5 लाख)
80D (स्वास्थ्य बीमा / Health Insurance)नहींहाँ (₹25k-75k)
HRA (मकान किराया भत्ता)नहींहाँ (Sec 10(13A))
Sec 24b (होम लोन का ब्याज)नहींहाँ (₹2 लाख)
NPS योगदान (नियोक्ता द्वारा - Employer)हाँ (Sec 80CCD(2))हाँ

5. ब्रेक-इवन कटौती रणनीति (Breakeven Point)

"ब्रेक-इवन पॉइंट" (Breakeven Point) पुरानी व्यवस्था में आवश्यक कुल कटौतियों की वह राशि है, जो नई व्यवस्था के कर भुगतान के बराबर होती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एक सामान्य नियम:

  • 12.75 लाख तक आय: पुरानी व्यवस्था लगभग कभी भी फायदेमंद नहीं होती, जब तक कि कटौती आय के 50% से अधिक न हो।
  • 15 लाख की आय: पुरानी व्यवस्था को लाभदायक बनाने के लिए आपको लगभग ₹4.25 लाख की कटौतियों (80C + HRA + 80D + 24b) की आवश्यकता होती है।
  • 25 लाख से अधिक की आय: कर का अंतर कम होने लगता है, और भारी होम लोन परिदृश्य (Sec 24b) में अक्सर पुरानी व्यवस्था फिर से आकर्षक हो जाती है।

6. उदाहरणात्मक केस स्टडी (राहुल का वेतन: ₹15 लाख)

वेतन (Salary): ₹15,00,000 | 80C: ₹1.5L | HRA: ₹1.2L

नई व्यवस्था (New Regime):
कर योग्य आय: ₹14.25L (₹75k मानक कटौती के बाद)
कर का भुगतान: ₹93,750 + Cess = ₹97,500

पुरानी व्यवस्था (Old Regime):
कर योग्य आय: ₹11.8L (SD, 80C, HRA कटौती के बाद)
कर का भुगतान: ₹1,66,500 + Cess = ₹1,73,160

राहुल नई व्यवस्था में ₹75,660 की बचत करेगा!

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अस्वीकरण: यह मार्गदर्शिका वित्त अधिनियम 2025 पर आधारित है और केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। पेशेवर कर नियोजन और अपनी व्यक्तिगत फाइलिंग के लिए हमेशा एक सीए (CA) से परामर्श लें।

आधिकारिक संदर्भ और स्रोत